প্ৰাচীন পুথি, ৰাইফল ইত্যাদি : ৰৌ আৰু জিলাপীৰ পম খেদি <br>Volume 1 | Issue 3 [July 2021]

প্ৰাচীন পুথি, ৰাইফল ইত্যাদি : ৰৌ আৰু জিলাপীৰ পম খেদি
Volume 1 | Issue 3 [July 2021]

হিন্দুসকলৰ খাদ্যাভ্যাসক কেন্দ্ৰ কৰি এ. কে. ৰামানুজনে তেওঁৰ এখন ৰচনাত এটি কাহিনী বৰ্ণনা কৰিছিল। গুৰুকূলৰ শিষ্য এজনক আহাৰৰ নামত গুৰুৱে হেনো মাথো এৰা গুটিৰ তেলেৰে ভাত এমুঠি গুৰুপত্নীক দিবলৈ নিৰ্দ্দেশ দিয়ে... — আশুতোষ ভৰদ্বাজ
पांडुलिपियों और बंदूकों की डगर पर रोहू मछली और जलेबी <br>Volume 1 | Issue 3 [July 2021]

पांडुलिपियों और बंदूकों की डगर पर रोहू मछली और जलेबी
Volume 1 | Issue 3 [July 2021]

एक बार एक विद्यार्थी गुरूकुल में पढ़ने जाता है। गुरु अपनी पत्नी को निर्देश देते हैं कि उसे सिर्फ चावल और अरंडी का तेल दिया जाये। विद्यार्थी इसे गुरु का आदेश मान भक्त-भाव से ग्रहण करता है... — आशुतोष भारद्वाज
मुझे खाने के किस्से याद हैं , व्यंजन बनाने की विधियाँ नहीं <br>Volume 1 | Issue 2 [June 2021]

मुझे खाने के किस्से याद हैं , व्यंजन बनाने की विधियाँ नहीं
Volume 1 | Issue 2 [June 2021]

अब जब मैं 70 बरस की हो गई हूँ, तब जाकर मैं खाने का आदर करने लगी हूँ। अब मैं समझ चुकी हूँ कि खाना सिर्फ खाकर निपटाने की चीज़ नहीं है बल्कि उसे खाने के विविध तरीके होते हैं और उसकी मात्रा तथा गुणवत्ता का सही होना, निहायत ज़रूरी है... — Leela Samson
मला जगणं आठवतं, पाककृती नाही. <br> Volume 1 | Issue 2 [June 2021]

मला जगणं आठवतं, पाककृती नाही.
Volume 1 | Issue 2 [June 2021]

आता जेव्हा मी वयाची सत्तरी गाठली आहे, तेव्हा माझ्या मनात अन्नाबद्दलचा आदर अतिशय वाढला आहे. अन्न कधी खायचं, कसं खायचं, किती खायचं आणि काय खायचं याचं भान मला आहे. इतकंच नाही तर एखादं अन्न खाल्ल्यावर ते किती काळ अजीर्ण राहू शकतं आणि माझ्या पोटावर त्याचा बरा वाईट परिणाम... — Leela Samson
আমি শ্রীশ্রী ভজহরি রাঁধুনি <br>Volume 1 | Issue 1 [May 2021]

আমি শ্রীশ্রী ভজহরি রাঁধুনি
Volume 1 | Issue 1 [May 2021]

লেখক নয়, আমি নিজেকে বলে থাকি লেখোয়াড়। সেই যেমন লোকে খেলতে খেলতে খেলোয়াড় হয়ে যায়- কোন তালিম ছাড়াই লিখতে লিখতে আমি হয়ে গেছি লেখোয়াড়। তবে লেখোয়াড় হবার আগে ছিলাম রাঁধুনি । তাঁর আগে রিকশা চালক । তাঁর আগে যে আরো কত কী ! — Manoranjan Byapari
श्री भजहरी राधुनि की कथाएँ <br>Volume 1 | Issue 1 [May 2021]

श्री भजहरी राधुनि की कथाएँ
Volume 1 | Issue 1 [May 2021]

मैं अपने-आप को लेखक नहीं समझता। जैसे खेलते – खेलते लोग खिलाड़ी कहलाने लगते हैं उसी तरह मैं बिन मंशा, बिन पढ़ाई –लिखाई, लिखने लगा और लेखक कहलाया जाने लगा। लेकिन लेखक होने से पहले मैं एक रसोइया था। उससे पहले मैं रिक्शा चलाया करता था और उससे भी पहले… क्या-क्या कहूँ? फेहरिस्त लंबी है। — Manoranjan Byapari
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